यह टूल आपके ब्राउज़र में ही चलता है: आप जो भी लिखते या चुनते हैं, वह कहीं अपलोड नहीं होता।
EMI कैलकुलेटर से आप किसी भी लोन की हर महीने की किस्त तुरंत निकाल सकते हैं। ऊपर लोन की रकम (₹), सालाना ब्याज दर (%) और लोन की अवधि भरें, फिर EMI निकालें दबाएं।
उदाहरण: ₹10,00,000 का लोन, 9% सालाना ब्याज, 20 साल। EMI लगभग ₹8,997 हर महीने बनेगी और 20 साल में कुल ब्याज करीब ₹11,59,342 होगा। यह अनुमान है, बैंक की असली EMI थोड़ी अलग हो सकती है।
होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन या एजुकेशन लोन, ज्यादातर लोन की किस्त एक ही फॉर्मूले से बनती है। इस पेज पर हम बताएंगे कि टूल कैसे चलाएं, EMI का हिसाब कैसे बनता है, ब्याज दर बदलने पर क्या होता है और लोन लेने से पहले क्या जांचें। लोन के लिए आवेदन से पहले अपना CIBIL स्कोर मुफ्त में चेक कर लें, क्योंकि कई बैंक स्कोर देखकर ही ब्याज दर तय करते हैं।
EMI कैलकुलेटर कैसे इस्तेमाल करें
- लोन की रकम (₹) में वह रकम लिखें जो आप उधार ले रहे हैं, जैसे 1000000। कॉमा (,) या ₹ न लगाएं, सिर्फ अंक लिखें।
- सालाना ब्याज दर (%) में बैंक की बताई सालाना दर लिखें, जैसे 9 या 8.75। महीने की दर नहीं, साल की दर डालें।
- लोन की अवधि में संख्या लिखें और अवधि किसमें से साल या महीने चुनें। 20 साल और 240 महीने का जवाब एक ही आएगा।
- EMI निकालें दबाएं। सबसे ऊपर बड़े अक्षरों में हर महीने की EMI दिखेगी।
- नीचे टेबल में कुल ब्याज और कुल भुगतान देखें, पट्टी (मीटर) में मूलधन और ब्याज का हिस्सा देखें, और फिर साल-दर-साल हिसाब पढ़ें।
रिजल्ट में क्या-क्या दिखता है
- हर महीने की EMI: पूरे रुपये में गोल करके।
- लोन की रकम, कुल ब्याज और कुल भुगतान: कुल भुगतान = EMI × कुल महीने।
- मूलधन बनाम ब्याज: एक पट्टी जो दिखाती है कि कुल भुगतान में कितना हिस्सा ब्याज का है।
- साल-दर-साल टेबल: हर साल कितना मूलधन चुकाया, कितना ब्याज गया और साल के अंत में कितना लोन बाकी रहा।
- फॉर्मूला: आपकी संख्याओं के साथ, ताकि आप खुद मिलान कर सकें।
EMI का फॉर्मूला और पूरा उदाहरण
बैंक जो EMI बताते हैं, वह आम तौर पर घटते बैलेंस (reducing balance) वाले इस फॉर्मूले से बनती है:
EMI = P × r × (1 + r)^n ÷ ((1 + r)^n − 1)
- P = लोन की रकम
- r = महीने की ब्याज दर = सालाना दर ÷ 12 ÷ 100
- n = कुल किस्तें, यानी महीने
- अगर ब्याज दर 0% हो, तो EMI = P ÷ n। टूल यह स्थिति भी संभालता है।
उदाहरण: ₹10 लाख का होम लोन, 9% ब्याज, 20 साल
- P = ₹10,00,000, r = 9 ÷ 12 ÷ 100 = 0.0075, n = 20 × 12 = 240
- फॉर्मूले में रखने पर EMI = ₹8,997.26, यानी लगभग ₹8,997 हर महीने।
- कुल भुगतान = 8,997.26 × 240 ≈ ₹21,59,342
- कुल ब्याज = 21,59,342 − 10,00,000 ≈ ₹11,59,342
यानी 20 साल में ब्याज, मूल लोन से भी ज्यादा बनता है। शुरुआती सालों में EMI का बड़ा हिस्सा ब्याज में जाता है, क्योंकि ब्याज बाकी लोन पर लगता है और शुरू में बाकी लोन सबसे ज्यादा होता है। टूल की साल-दर-साल टेबल में यही दिखता है:
| साल | उस साल दिया मूलधन | उस साल दिया ब्याज | साल के अंत में बाकी रकम |
|---|---|---|---|
| 1 | ₹18,727 | ₹89,240 | ₹9,81,273 |
| 2 | ₹20,484 | ₹87,483 | ₹9,60,789 |
| 3 | ₹22,405 | ₹85,562 | ₹9,38,384 |
| 20 | ₹1,02,883 | ₹5,084 | ₹0 |
पहले साल आपने 12 किस्तों में करीब ₹1,07,967 दिए, पर लोन सिर्फ ₹18,727 घटा। आखिरी साल में तस्वीर उलटी है: ज्यादातर पैसा मूलधन में जाता है। यही वजह है कि लोन के शुरुआती सालों में किया गया प्रीपेमेंट ब्याज ज्यादा बचाता है।
ब्याज दर बदली तो EMI पर क्या असर पड़ता है
कई होम लोन फ्लोटिंग रेट पर होते हैं, यानी बैंक की बेंचमार्क दर बदलने पर आपकी ब्याज दर भी बदलती है। ऊपर वाले उदाहरण में अगर दर शुरुआत से 9% की जगह 9.5% हो, तो:
- 20 साल की अवधि वही रहे तो EMI ₹8,997 से बढ़कर ₹9,321 हो जाती है (₹324 ज्यादा) और कुल ब्याज करीब ₹12,37,115 बनता है।
- EMI ₹8,997 ही रहे तो लोन चुकाने में लगभग 269 महीने लगेंगे, यानी करीब 22 साल 5 महीने, लगभग 29 किस्तें ज्यादा।
RBI ने 18 अगस्त 2023 के सर्कुलर में EMI वाले फ्लोटिंग रेट पर्सनल लोन (जिसमें होम लोन भी आते हैं) के लिए बैंकों और NBFC को ये बातें कही हैं:
- लोन मंजूर करते समय साफ बताना कि बेंचमार्क दर बदलने पर EMI, अवधि या दोनों बदल सकते हैं, और बढ़ोतरी की सूचना तुरंत देना।
- दर रीसेट होने पर ग्राहक को विकल्प: EMI बढ़वाना, अवधि बढ़वाना या दोनों का मेल, और लोन का कुछ हिस्सा या पूरा लोन पहले चुकाना।
- बैंक अपनी बोर्ड-मंजूर पॉलिसी के हिसाब से फिक्स्ड रेट पर जाने का विकल्प दे सकते हैं; इसके सारे चार्ज मंजूरी पत्र (sanction letter) में साफ लिखे होने चाहिए।
- हर तिमाही के अंत में स्टेटमेंट: अब तक चुकाया मूलधन और ब्याज, EMI, बची किस्तें और सालाना ब्याज दर या APR।
दर बढ़ने की खबर आए तो टूल में नई दर और बची हुई अवधि डालकर नई EMI देख लें। अवधि बढ़ने का पूरा हिसाब यह टूल सीधे नहीं दिखाता; उसके लिए बैंक से नया repayment schedule मांगें।
बैंक की EMI और इस टूल के जवाब में फर्क क्यों आता है
- राउंडिंग: बैंक EMI को अपने तरीके से गोल करते हैं, इसलिए आखिरी किस्त थोड़ी अलग हो सकती है।
- पहली EMI की तारीख: लोन मिलने और पहली EMI के बीच के दिनों का ब्याज (ब्रोकन पीरियड या प्री-EMI ब्याज) अलग से लिया जा सकता है।
- फीस और बीमा: प्रोसेसिंग फीस, लोन बीमा और उन पर लगने वाला GST फॉर्मूले में नहीं आते, पर आपका कुल खर्च बढ़ाते हैं।
- फ्लोटिंग दर: दर बदलेगी तो EMI या अवधि भी बदलेगी।
- फ्लैट रेट: कुछ लोन ऑफर “फ्लैट” दर बताते हैं, जिसमें ब्याज पूरे मूल लोन पर लगता है, घटते बैलेंस पर नहीं। ऐसे में असली ब्याज दर बताई गई दर से काफी ज्यादा होती है। यह टूल घटते बैलेंस वाला तरीका इस्तेमाल करता है। बहुत आसान लोन देने वाले ऐप से सावधान रहें: लोन ऐप फ्रॉड से कैसे बचें।
लोन लेने से पहले EMI कैलकुलेटर से ये जांच लें
- EMI भरने के बाद घर का खर्च, बचत और इमरजेंसी के लिए पैसे बचते हैं या नहीं।
- अवधि लंबी करने से EMI घटती है, पर कुल ब्याज बढ़ता है। ₹10 लाख, 9% पर 15 साल में EMI ₹10,143 और कुल ब्याज करीब ₹8,25,680 है, जबकि 20 साल में EMI ₹8,997 और ब्याज करीब ₹11,59,342।
- दरों में छोटा फर्क भी लंबे लोन में बड़ा बनता है। 9% की जगह 8.75% पर 20 साल की EMI ₹8,837 और कुल ब्याज करीब ₹11,20,906 बनता है, यानी लगभग ₹38,000 कम।
- प्रीपेमेंट या फोरक्लोज़र चार्ज और फ्लोटिंग से फिक्स्ड रेट पर जाने की फीस मंजूरी पत्र में पढ़ें।
- स्कोर कमजोर है तो पहले उसे सुधारें: CIBIL स्कोर कैसे बढ़ाएं।
मोबाइल और कंप्यूटर पर आम दिक्कतें
- Android: खाने में कॉमा या ₹ टाइप करने पर संख्या स्वीकार नहीं होती। सिर्फ अंक और दशमलव (.) लिखें।
- iPhone: नंबर कीपैड खुलने पर बटन छिप सकता है। कीबोर्ड बंद करें (Done) और थोड़ा नीचे स्क्रॉल करके EMI निकालें दबाएं।
- कंप्यूटर: आखिरी खाना भरकर Enter दबाने से भी हिसाब हो जाता है।
- अवधि में दशमलव (जैसे 7.5 साल) नहीं चलता। ऐसे में महीने चुनें और 90 लिखें।
- रिजल्ट न दिखे तो पेज रिफ्रेश करें, या Chrome, Safari, Firefox जैसे ब्राउज़र का नया वर्ज़न इस्तेमाल करें।
प्राइवेसी और सीमाएं
सारा हिसाब आपके फोन या कंप्यूटर के ब्राउज़र में ही होता है। आपकी लोन की रकम या ब्याज दर कहीं भेजी या सेव नहीं की जाती। इसके लिए न लॉगिन चाहिए, न मोबाइल नंबर।
- टूल पूरे लोन पर एक ही ब्याज दर मानता है; बीच में दर बदलना, प्रीपेमेंट या स्टेप-अप EMI इसमें नहीं जुड़ते।
- फीस, बीमा और टैक्स इसमें शामिल नहीं हैं।
- नतीजा अनुमान है। लोन का अंतिम फैसला बैंक के मंजूरी पत्र और repayment schedule के आधार पर ही करें।
जमा पर ब्याज या साधारण ब्याज का हिसाब करना हो तो ब्याज कैलकुलेटर देखें। निवेश का अनुमान लगाने के लिए SIP कैलकुलेटर है, और बैंकिंग से जुड़े बाकी गाइड बैंकिंग सेक्शन में मिलेंगे।
FAQ
EMI कैलकुलेटर का जवाब बैंक की EMI से अलग क्यों है?
आम तौर पर फर्क राउंडिंग, पहली EMI से पहले के दिनों के ब्याज, या बैंक की असली दर अलग होने से आता है। अपने मंजूरी पत्र में लिखी दर और अवधि टूल में डालकर मिलान करें।
क्या EMI में प्रोसेसिंग फीस शामिल होती है?
नहीं। प्रोसेसिंग फीस आम तौर पर लोन देते समय अलग से काटी या ली जाती है। EMI सिर्फ मूलधन और ब्याज से बनती है।
अवधि घटाने से कितना ब्याज बचता है?
एक ही दर पर अवधि जितनी छोटी, कुल ब्याज उतना कम, पर EMI ज्यादा। ₹10 लाख, 9% पर 20 की जगह 15 साल चुनने से कुल ब्याज लगभग ₹3,33,662 कम होता है। टूल में दोनों अवधि डालकर अपने बजट के हिसाब से देखें।
कार लोन और पर्सनल लोन के लिए भी यही टूल चलेगा?
हां, ज्यादातर EMI वाले लोन में यही फॉर्मूला लगता है। जैसे ₹5,00,000 का कार लोन 10% पर 5 साल के लिए हो, तो EMI करीब ₹10,624 और कुल ब्याज करीब ₹1,37,411 बनता है।
क्या मेरी जानकारी कहीं सेव होती है?
नहीं। हिसाब आपके ब्राउज़र में ही होता है और कोई जानकारी सर्वर पर नहीं भेजी जाती।