डिजिटल अरेस्ट स्कैम एक ठगी है जिसमें अपराधी खुद को पुलिस, CBI, नारकोटिक्स, RBI या ED का अफसर बताकर फोन या वीडियो कॉल पर आपको डराते हैं कि आप किसी केस में फंसे हैं, और “मामला निपटाने” के नाम पर पैसे मांगते हैं।
याद रखें: सरकार के मुताबिक कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर जांच नहीं करती। ऐसा कॉल आए तो कॉल काटें, किसी को पैसे न भेजें, और तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।
ध्यान दें: HindiTribe एक स्वतंत्र वेबसाइट है। हम किसी सरकारी विभाग, बैंक, UIDAI या NPCI से जुड़े नहीं हैं। आवेदन, भुगतान और लॉग-इन हमेशा आधिकारिक पोर्टल या ऐप पर ही करें।
यह लेख गृह मंत्रालय और PIB की आधिकारिक चेतावनियों पर आधारित है (अक्टूबर 2026 तक)। सरकार के अनुसार यह एक संगठित ऑनलाइन आर्थिक अपराध है, जिसे सीमा पार के गिरोह चलाते हैं, और देशभर में कई लोग इसमें बड़ी रकम गंवा चुके हैं। पढ़े-लिखे और समझदार लोग भी डर की वजह से इसमें फंस जाते हैं, इसलिए इसे पूरा पढ़ें और घर के लोगों को भी बताएं।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम कैसे होता है
गृह मंत्रालय की चेतावनी के अनुसार ठग आम तौर पर फोन करके इनमें से कोई कहानी सुनाते हैं:
- आपके नाम से भेजे गए या आपके नाम आए किसी पार्सल में ड्रग्स, नकली पासपोर्ट या कोई और गैरकानूनी सामान मिला है।
- आपका कोई करीबी किसी अपराध या एक्सीडेंट में पकड़ा गया है और “उनकी हिरासत” में है।
इसके बाद “केस” खत्म करने के नाम पर पैसे की मांग होती है। कई मामलों में पीड़ित को “डिजिटल अरेस्ट” में रखा जाता है, यानी कहा जाता है कि वीडियो कॉल (Skype या किसी और ऐप) पर लगातार सामने बैठे रहो और किसी को कुछ मत बताओ, जब तक पैसे न दे दो। असली दिखने के लिए ठग पुलिस स्टेशन या सरकारी दफ्तर जैसे दिखने वाले स्टूडियो से कॉल करते हैं और वर्दी भी पहनते हैं।
ठगों का पूरा खेल डर और जल्दबाज़ी पर टिका है। वे आपको सोचने का समय नहीं देते, परिवार से बात नहीं करने देते और बार-बार गिरफ्तारी या जेल की धमकी देते हैं। जैसे ही आप रुककर किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करते हैं, उनकी कहानी कमज़ोर पड़ने लगती है।
इन संकेतों से पहचानें कि कॉल फर्ज़ी है
- कॉल करने वाला खुद को पुलिस, CBI, NCB, RBI, ED या कस्टम्स का अफसर बताता है और फोन पर ही आपको “आरोपी” बना देता है।
- वह वीडियो कॉल पर बने रहने, कैमरा चालू रखने या घर में किसी से बात न करने का दबाव डालता है।
- “गिरफ्तारी”, “वारंट” या “जेल” का डर दिखाकर तुरंत फैसला करने को कहता है।
- “केस सेटल” करने या “जांच” के नाम पर किसी खाते में पैसे भेजने को कहता है।
- पीछे पुलिस स्टेशन जैसा सेटअप, वर्दी या कोई ID कार्ड दिखाकर भरोसा जीतने की कोशिश करता है।
- स्क्रीन पर +91 वाला भारतीय नंबर दिखता है, जबकि सरकार के मुताबिक ऐसे कई कॉल असल में विदेश से आते हैं।
सरकार ने साफ कहा है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर जांच नहीं करती। वीडियो कॉल पर “गिरफ्तार” करके घंटों बैठाना और पैसे मांगना सीधी-सीधी ठगी है, चाहे सामने वाला कितना भी असली क्यों न लगे।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम से बचने का मंत्र: रुको, सोचो, एक्शन लो
प्रधानमंत्री ने 27 अक्टूबर 2024 के “मन की बात” में इस ठगी से बचने के लिए तीन कदम बताए: रुको, सोचो और एक्शन लो। इसे आसान भाषा में ऐसे समझें:
- रुको: घबराएं नहीं। डर में कोई पर्सनल जानकारी, OTP, बैंक डिटेल या पैसा न दें। ठग जितनी जल्दी मचाएं, आप उतना ही धीरे चलें।
- सोचो: खुद से पूछें, क्या कोई असली अफसर वीडियो कॉल पर पूछताछ करेगा और पैसे मांगेगा? नहीं। कॉल काटकर परिवार के किसी सदस्य या भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें।
- एक्शन लो: तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें। कॉल का नंबर, स्क्रीनशॉट और जो भी जानकारी हो, संभालकर रखें।
पैसे भेज दिए हैं तो तुरंत क्या करें
- तुरंत 1930 पर कॉल करें। वित्तीय साइबर फ्रॉड की तुरंत रिपोर्टिंग और ठगों तक पैसा पहुंचने से रोकने के लिए सरकार का Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System बना है। जितनी जल्दी शिकायत होगी, पैसा रोके जाने की उम्मीद उतनी ज़्यादा है।
- cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। होम पेज पर Register a Complaint में जाकर Financial Fraud वाला विकल्प चुनें और ट्रांज़ैक्शन की पूरी डिटेल भरें।
- अपने बैंक को बताएं। बैंक की आधिकारिक हेल्पलाइन या ब्रांच से संपर्क करके ट्रांज़ैक्शन की शिकायत करें और ज़रूरत हो तो नेट बैंकिंग या UPI पर रोक लगवाएं।
- सबूत संभालें। कॉल करने वाले का नंबर, वीडियो कॉल वाली ID, चैट, स्क्रीनशॉट, UTR नंबर और जिन खातों में पैसा गया उनकी डिटेल।
- पासवर्ड और PIN बदलें, अगर आपने किसी को OTP या पासवर्ड बताया था या उनके कहने पर कोई ऐप इंस्टॉल किया था।
शिकायत की पूरी प्रक्रिया स्टेप बाय स्टेप हमारी गाइड ऑनलाइन फ्रॉड की शिकायत कैसे करें में है।
पैसा नहीं गया, सिर्फ कॉल आया था, तब भी रिपोर्ट करें
अगर आप बच गए, तब भी रिपोर्ट करना दूसरों को बचाता है। दूरसंचार विभाग के Sanchar Saathi पोर्टल पर Chakshu – Report Suspected Fraud Communication में ऐसे कॉल, SMS या WhatsApp की शिकायत कर सकते हैं। इसमें पुलिस, CBI, कस्टम्स, आधार या RBI बनकर ठगी की अलग कैटेगरी है। विदेश से आए कॉल पर +91 वाला भारतीय नंबर दिखे, तो उसी पोर्टल पर Report Incoming International Call With Indian Number से भी रिपोर्ट कर सकते हैं।
cybercrime.gov.in पर Report & Check Suspect सेक्शन में आप किसी संदिग्ध मोबाइल नंबर, ईमेल, बैंक खाते या वेबसाइट को रिपोर्ट या सर्च भी कर सकते हैं। फ्रॉड कॉल की शिकायत के बाकी तरीके हमारी गाइड फ्रॉड कॉल की शिकायत में हैं।
घर के बुज़ुर्गों और बच्चों को कैसे समझाएं
- उन्हें साफ बताएं: पुलिस या कोई एजेंसी वीडियो कॉल पर पूछताछ या “गिरफ्तारी” नहीं करती।
- एक घरेलू नियम बनाएं: पैसे से जुड़ी या डराने वाली कोई भी कॉल आए, तो पहले परिवार के किसी सदस्य को फोन करें।
- 1930 नंबर उनके फोन में “साइबर हेल्पलाइन” नाम से सेव कर दें।
- अनजान नंबर से आए वीडियो कॉल न उठाने की आदत डालें।
- समझाएं कि “किसी को मत बताना” कहना ही सबसे बड़ा संकेत है कि कुछ गड़बड़ है।
ऐसी ही दूसरी ठगियों के बारे में भी पढ़ें: फर्ज़ी कस्टमर केयर नंबर स्कैम और लोन ऐप फ्रॉड। साइबर सुरक्षा की सारी गाइड साइबर सुरक्षा सेक्शन में हैं।
FAQ
क्या पुलिस वीडियो कॉल पर किसी को गिरफ्तार कर सकती है?
नहीं। सरकार के मुताबिक कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल पर जांच नहीं करती। वीडियो कॉल पर “अरेस्ट” करके पैसे मांगना ठगी है।
डिजिटल अरेस्ट स्कैम की शिकायत कहां करें?
तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। अपने बैंक को भी तुरंत बताएं।
कॉल करने वाले के पास मेरी पर्सनल जानकारी है, तो क्या वह असली है?
ठगों के पास आपका नाम, पता या दूसरी जानकारी हो सकती है, इससे वे असली नहीं हो जाते। पैसे की मांग और वीडियो कॉल पर दबाव, यही ठगी की पहचान है।
क्या भेजा हुआ पैसा वापस मिल सकता है?
जितनी जल्दी 1930 पर रिपोर्ट करेंगे, पैसा रोके जाने की संभावना उतनी बढ़ती है। इसकी कोई गारंटी नहीं है, इसलिए एक मिनट भी देर न करें।









